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*क्या हुआ जो मैमूना बेगम ने सिखों से पुश्तैनी दुश्मनी निभाते हुए, काँट-छाँट करके लूला-लंगड़ा पंजाबी सूबा सिखों को दिया?

*क्या हुआ जो दुर्दांत बाबर की प्रशंसक ने दरबार साहिब पर फ़ौज़ चढ़ा दी और हज़ारों निर्दोष श्रद्धालुओं को क़त्ल कर डाला, आखिर चंगेज़ खान ने भी तो दिल्ली में कत्लेआम करवाया ही था?

*क्या हुआ जो इसके बेटे ने भी इस देश में अपने पद का दुरूपयोग करके सारे देश में सिखों को कत्ल करवाया और कातिलों को ईनामात दिए, उन्हें सरकारी सुरक्षा दी और सभी सुविधाएँ दी? आखिर मुग़ल राजाओं के बेटे भी अपने बाप से बढ़ कर न्रशंस ही पैदा हुए हैं?

*क्या हुआ जो इसकी बिजली और पानी के अधिकार से इसे वंचित कर दिया गया?

*क्या हुआ जो इसकी राजधानी क्षेत्र को भी केंद्र के कब्ज़े में रखा गया?

*क्या हुआ जो हरयाणा १९६६ से इस पंजाबी सूबे की राजधानी में बिना किराया दिए कब्ज़ा जमाये बैठा है?

*क्या हुआ जो बिना किसी मूल्य के इस पंजाबी सूबे का पानी पडोसी राज्यों को दिया जा रहा है जबकि बाकी सभी प्रदेश अपने संसाधनों को मूल्य लेकर ही देते हैं?

क्या हुआ जो पंजाब के पानी में यूरेनियम मिक्स हो गया? जब सरकार स्वयं इसको रेगिस्तान बनाने पर तुली हो, ज़मीन बंजर होती जा रही हो, ज़मीन के नीचे पानी का स्तर सैकड़ों फ़ीट नीचे गिर गया हो, सरकार को तो राजस्थान हरा बनाना है, पंजाब को कुर्बान करके क्योंकि यह सिख देश है और सिख भारतीय नहीं?

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फिर भी हमारा यह छोटा सा पंजाब (जो हर सिख के हृदय में बसता है चाहे वह संसार के किसी भी देश में क्यों न रहता हो), सोने की चिड़िया है, भले ही इस का कद्रदान कोई जौहरी नहीं पत्थरों के व्यापारी हैं?

हमारा यह सूबा, हमारा सिख देश जिसे सिख खालिस्तान के नाम से भी जानते हैं, कई अन्य देशों से बड़ा है, मिसाल के तौर पर वेनेज़ुएला, मॉरीशस, एस्टोनिया,गिनी-बसाऊ, चिली, मकाऊ, कांगो, तिमोर-लेस्ते, लात्विया, जमैका, लग्जमबर्ग, मंगोलिया आदि देशों से बड़ा है!

बहुत से ऐसे देश हैं जो समुद्र से दूर हैं जैसे भारत का पडोसी देश नेपाल !

देश छोटा हो या बड़ा हो, कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है जब निवासियों से भेदभाव किया जाये, किसी वर्ग विशेष पर जुल्म किये जाएँ, उन्हें न्याय से वंचित किया जाये, कातिलों को सरकारी सुरक्षा देनी शुरू की जाये, अविश्वास की स्थिति बन जाये, जनता से उसके प्रजातान्त्रिक अधिकार छीन लिए जाएँ, पुलिस के और सुरक्षा बल जिम्मेदारी से कार्य न करते हुए अपितु नृशंसता पूर्वक जुल्म करें, यदि धनोपार्जन के नए स्त्रोत न ढूंढें जाएँ और विदेशी मुद्रा का देश में लाने में अपने ही नागरिकों को तंग किया जाये,कारोबारियों को देश के उच्च पद दिए जायें तो लानत ऐसे देश और संविधान पर ?

इतना सब होने के बावजूद भी सिखों का न तो हौंसला टूटा है  और न ही वे भयभीत हैं अपितु इस जुल्म का अपनी पूरी ताक़त से विरोध कर रहे हैं! सिख एक जिंदादिल क़ौम है, शान से जीती है तो शान से मरती भी है ! भारत के प्रति अविश्वास उत्पन्न होने का परिणाम-एक स्वतंत्र देश खालिस्तान का उदय! यह बात जितनी जल्दी भारत सरकार समझ ले उतना ही अच्छा !

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अजमेर सिंह रंधावा

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