क्या नेता जी नहीं जानते थे कि सेलुलर जेल में डाक्टर दीवान सिंह(आई एन ए प्रमुख ) को प्रताड़ित किया जा रहा है और वे जश्न में मस्त रहे?

सिखों के नौवें गुरु – गुरु तेग बहादर जी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपनी क़ुरबानी दी थी!

उनके बेटे दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था!

यह १६वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा १७वीं शताब्दी के शुरुआत की बात है!

Dr. Diwan Singh

उन्हीं के पद चिन्हों पर चलते हुए लगभग ३०० वर्षों के बाद उनके शिष्य डाक्टर दीवान सिंह ने अंडमान निकोबार के सभी निवासियों की रक्षा तथा वहां की स्त्रियों की इज़त-आबरू की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया! उनकी मधुर स्मृति में वहां एक गुरुद्वारा बना है जिसकी प्रबंध समिति में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई व् सिख सभी के प्रतिनिधि हैं और मिल कर इस गुरूद्वारे का प्रबंध देखते हैं!

विश्व का शायद ऐसा अकेला गुरुद्वारा है, जिस की प्रबंध कमिटी में सभी धर्म के अनुयाई हैं और सिख धर्म में किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर गुरुद्वारा बनाने की परंपरा नहीं है जबकि मानवता के प्रति उनके बलिदान को देखते हुए इस गुरूद्वारे का नामकरण भी उन्हीं के नाम पर किया गया है!

आपकी जानकारी के लिए यह अवशय बता दूँ कि जब उन्हें सेलुलर जेल में प्रताड़ित किया जा रहा था तो नेताजी सुबाष बोस काले पानी की इस जेल के निरीक्षण के लिए आये थे, या तो उनसे डाक्टर दीवान सिंह को बंदी बनाये जाने की बात छुपा ली गई थी या फिर उन्होंने ने जापानियों के इस दुर्व्यवहार पर अपना मुख बंद रखना ही श्रेयस्कर समझा हो, वे ही जानें!

डाक्टर दीवान सिंह-८२ वर्षीय डाक्टर जो अंडमान निकोबार समूह के INA के प्रमुख भी थे, को जापानियों द्वारा बहुत ही तड़पा तड़पा कर मारा गया था, लेकिन क्यों?

आइये इसे जानें;
लेफ्टिनेंट ए. डी. लोगानाथन को अंडमान निकोबार का प्रथम गवर्नर जनरल बनाया गया और अंडमान निकोबार का नाम बदल कर शहीद एवं स्वराज किया गया, परन्तु जापानी नेवी ने फिर भी अपना प्रभुत्व नहीं त्यागा ! वह द्वीप की मुख्य भूमि पर बनी रही ! २९ से ३१ दिसम्बर तक सुभाष ने अंडमान की यात्रा की और केवल एक रात ही वे इस द्वीप पर रुके ! सेल्युलर जेल में सुभाष को ले जाया गया था ! पूर्ण आवभगत भी की गई परन्तु जापानी सेना जो अत्याचार वहाँ पर द्वीप वासियों पर कर रही थी, उसकी भनक भी सुभाष को नहीं लगने दी गई !

अंडमान के ८० वर्षीय सिख नेता डाक्टर दीवान सिंह जी, जो INA के सदस्य भी थे, स्थानीय INA की शाखा के प्रमुख भी थे और वे स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व भी कर रहे थे, तथा वे जापानियों पर दबाव भी बना रहे थे कि उन लोगों पर (स्थानीय द्वीप वासियों पर) अत्याचार न किए जाए,बहू -बेटियों के साथ बलात्कार बंद किए जाएं व निर्दोषों की हत्याएं बंद की जाएं !

इससे बौखला कर जापानियों ने डाक्टर दीवान सिंह जी को सेल्युलर जेल में बंद कर दिया और उन्हें इस उम्र में भी उलटा लटका कर भयंकर यातनाएं दी गईं तथा अंत में इनकी ह्त्या कर दी गई ! इस सेल्युलर जेल का निर्माण १९०६ में किया गया था !

जब सुभाष अंडमान का और सेल्युलर जेल का दौरा कर रहे थे तो जेल में ही डाक्टर दीवान सिंह तथा अन्य भारतीयों को यातनाएं दी जा रही थीं, जिसका पता सुभाष को शायद नहीं लगने दिया गया था !

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की भारतीय जनता जिसकी संख्या लगभग ४०,००० थी, में से ३०,००० के लगभग निर्दोष निवासियों को जापानियों द्बारा कत्ल कर दिया गया था और द्वीप की लगभग सभी स्त्रियों से बलात्कार किए गए थे !

अफ़सोस इस बात का है कि हमारे भारत देश के प्रधान मंत्री जापान कि यात्रा करते हैं, उनका भी यहाँ स्वागत किया जाता है लेकिन किसी भी भारतीय प्रधान मंत्री ने जापान सरकार से अंडमान निकोबार में जापानी सेना द्वारा निर्दोष नागरिकों की हत्याओं, वहां की सभी स्त्रियों के साथ बलात्कार किये जाने पर जापान सरकार से कभी माफ़ी मांगने को दबाव नहीं बनाया, दबाव तो दूर की बात माफ़ी मांगने को भी नहीं कहा! क्या यह इस देश के लिए शर्म की बात नहीं है जबकि जापान पहले ही कोरिया आदि देशों से इन्हीं आरोपों में माफ़ी मांग चुका है! 

AS Randhawa-1

अजमेर सिंह रंधावा !

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