Whether India is a secular nation? No ! it just misguides.

भारत धर्म निरपेक्ष होने का दावा करता है लेकिन असली सत्य तो यह है कि यह देश दूसरे धर्मों के साथ केवल खिलवाड़ करता हैं, उन्हें पनपने ही नहीं देना चाहता!

अंग्रेज़ों ने हरिद्वार में गंगा पर बाँध बनाया ! हर की पौड़ी पर जो पानी आता है, वह गंगा की नहर है, एक सीमित मात्रा में पानी यहाँ छोड़ा जाता है, जरा सा अधिक होने पर भी यह वापिस नील धारा (मुख्य गंगा) में वापिस चला जाता है! अंग्रेज़ों ने पूर्ण सावधानी बरती कि यहाँ कभी जान माल का नुकसान न हो !

उन्होंने हिन्दुओं के इस धार्मिक स्थल के महत्व को जरा भी कम न होने दिया!

अब हिन्दुस्तानियों का कमाल भी देखिये !

पांवटा साहिब जो यहाँ हरिद्वार से पश्चिम दिशा में ११० किलो मीटर की दूरी पर है, वहां यमुना बहती है! आज़ादी के बाद भारत सरकार ने इस स्थान को बिजली उत्पादन के लिए चुना ! देहरा दून के उत्तर पश्चिम में स्थित डाक पत्थर और इससे भी ऊपर से कुल ७ छोटे छोटे बिजली घर बनाये गए, अधिकतर बिजली घरों में ३३ मेगा वाट बिजली का उत्पादन होता है!

चलो यह तो अच्छी बात है लेकिन सिखों के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल को बर्बाद कर दिया गया!

कैसे आइए आपको बताते हैं;

पांवटा साहिब में सिखों के दसवें गुरु-गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी युवावस्था के साढ़े चार साल व्यतीत किये!

History of Gurudwara Paonta sahib

एक बार वे मग्न होकर अकाल पुरख वाहेगुरु का स्मरण कर रहे थे, यमुना पहाड़ों से उतर कर मैदानी भागों में प्रवेश इसी स्थान से करती है, उसके पानी का शोर कुछ अधिक ही था जिस से उनकी आराधना में विघ्न उत्पन्न हो रहा था!

इस पर उन्होंने यमुना से कहा कि यमुना या तो हम इस क्षेत्र को छोड़ कर चले जाते हैं या तुम शांत होकर बहो, हमारी ईश्वर आराधना में विघ्न मत डालो!

इतना कहते ही जैसे यमुना को लकवा मार गया हो, उसने तत्काल प्रभाव से शांत होकर बहना शुरू कर दिया!

आज तक यमुना इस क्षेत्र में शांत भाव से बहती है, पानी जितना भी मर्जी कम या ज्यादा क्यों न हो?

Paonta view

लेकिन भारतीय इंजीनियरों का कमाल भी देखिये;

Dry River Bed Paonta

उन्होंने यहाँ से यमुना के पानी की धारा ही दूसरी दिशा की ओर कर दी, गुरूद्वारे के नीचे अब यमुना नहीं बहती है,

Paonta sahib in rainy season

तट के दूसरी ओर नहर बना कर, बिजली घर का निर्माण करके इसे सदा के लिए इस क्षेत्र से दूर कर दिया गया है जबकि …..

Paonta view-2

इसी स्थान को हर की पौड़ी की तरह विकसित करके पानी को एकत्रित किया जा सकता था और पांवटा साहिब की सीमा समाप्ति के पश्चात इसका पानी नहर द्वारा आगे ले जाया जा सकता था तो सिखों के इतिहास और धर्म के साथ खिलवाड़ किया गया या नहीं?

आप ही बताइये?

एक और बात …

पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब जो सिखों के प्रथम गुरु – गुरु नानक देव जी का जन्म स्थान भी है, इस गुरूद्वारे के नाम १७५०० एकड़ जमीन गुरु के समय से चली आ रही है, आज तक यह जमीन इसी गुरुद्वारा साहिब जी के नाम है, इसे उस समय मुस्लिम शासक राय बुलार ने गुरु को निरंकार जान कर उनके नाम कर दी थी, उसके पास कुल ३५००० एकड़ भूमि थी, जिसमें से आधी उसने गुरु के नाम वसीयत की थी, उसके वंशज वहां हैं लेकिन इस ज़मीन पर कभी दावा नहीं करते अपितु सम्मान देते हैं!

पाकिस्तान सरकार ने भी यह सिखों से यह ज़मीन हथियाने की कभी कोई कोशिश नहीं की, अपितु सिखों द्वारा इस स्थान पर विश्व की सबसे बड़ी पंजाबी यूनिवर्सिटी बनाने के प्रयास की सराहना की और उसे अपना समर्थन भी दिया है!

और हिदुस्तान की बात भी करते हैं….

पांवटा साहिब गुरूद्वारे के नाम ११० एकड़ भूमि थी लेकिन हिमाचल ने १९६६ में अस्तित्व में आते ही एक कानून बना कर यह ज़मीन छीन ली! आज गुरूद्वारे के पास महज 3 एकड़ ज़मीन ही होगी, पांवटा का सारा बाजार, अदालत, पुलिस थाना आदि इसी भूमि पर बना है! इस तरह गुरूद्वारे को किराये की राशि से होने वाली आय से भी वंचित कर दिया गया जो यात्रियों के लिए लंगर आदि का प्रबंध करती है, सरकार क्या देती है– बाबा जी का ठुल्लु?-

तो अब ही बताइये कि इस अन्याय के खिलाफ सिख कहाँ जाएँ. कोई रास्ता नहीं तो सिख होमलैंड या खालिस्तान ही आखिरी रास्ता बचता है क्योंकि यह अन्याय तो इस देश में चलता ही रहेगा!

Bathing at Paonta sahib

साथ ही एक तस्वीर पांवटा साहिब जी के यमुना घाट की है, अब यह अतीत की बात बन गई है लेकिन नासूर की तरह ज़ख्म अवश्य कर गई है!

MoAdd Mediare information at;
http://discrownedgurudwarapaontasahib.blogspot.in/

AS Randhawa-1

Ajmer Singh Randhawa.

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