Conspiracy against Sikhs by Govt. of India continues since 1947 ?

साजिसे तो सिक्ख कौम के साथ अजादी के बाद ही शुरु हो गई थी खालिसतानी अतंकवाद तो एक बहाना था सिक्खो का खुन बहाने का !

भारत में सिख कैदियों का अनुपात बाकी सभी धर्मों के जेलों में बंद कैदियों के मुकाबले कई गुना अधिक?

आश्चर्य है कि स्वतंत्रता पूर्व भी यूनाइटेड इंडिया में सिखों की गिनती २% थी और अब पाकिस्तान बन जाने के बाद बचे खुचे भारत में यह अनुपात भी २% ही है ! गुलाम भारत को आज़ाद करवाने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में सिखों का योगदान ९३% था !

लेकिन हाल ही में बी बी सी द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट में भारत में सिख कैदियों का अनुपात बाकी सभी धर्मों के जेलों में बंद कैदियों के मुकाबले कई गुना अधिक पाया गया है! इस रहस्योद्घाटन से मुझे बड़ा गहरा सदमा लगा है और ऐसा प्रतीति होता है कि इस देश के हिन्दू ही केवल सहिष्णु तथा धार्मिक प्रवृत्ति वाले हैं बाकि सभी मुस्लिम, ईसाई तथा सिख क्रिमिनल हैं!

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सिखों के योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता! हिन्दू भले ही संख्या में अधिक हों परन्तु स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर उनका स्वयं का योगदान नगण्य ही है! यह एक कटु सत्य है परन्तु स्वयं कांग्रेस सरकार ने इस सत्य को प्रकाशित किया था और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इसे कांग्रेस की मासिक पत्रिका में छपवाया था!

कृपया उनके द्वारा प्रस्तुत यह तालिका देखें :

दंड जिन्होंने सहे:
सिख….गैर सिख….कुल योग
जिन्हें फांसी दी गई
९३……….२८…………१२१
जिन्हें काला पानी की सज़ा दी गई
२१४७ ……४९९ ……२६४६
जलियांवाला बाग में कत्ल किए गए
७९९……….५०१……..१३००
बज बज घाट पर कत्ल किए गए
६७………… ४६………११३
कूका आन्दोलन में शहीद
९१………कोई नहीं…….९१
अकाली आन्दोलन में शहीद
५००…….कोई नहीं……५००
कुल योग
३६९७……..१०७४…….४७७१

और अब जब ये आंकड़े प्रस्तुत हुए हैं तो साजिश की बू आनी स्वाभाविक ही है ! इतनी संख्या में सिख कैदियों का होना भारत की न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाता है! स्पष्ट है कि यह सब किसी गुप्त निर्देशों के आधार पर ही किया जा रहा है! मैं तो भारत के राष्ट्रपति से पूछना चाहूँगा कि वे स्पष्ट करें कि क्या सिख क़ौम जरायमपेशा है जो उन्हें किसी भी अपराध में जेल में डाल कर इति श्री कर दी जाती है?

क्या कोई सिख न्यायधीश इस समूचे प्रकरण पर रौशनी डालेगा जिससे इस अनसुलझी पहेली को हल किया जा सके?

इससे पूर्व एक भूतपूर्व आई सी एस सरदार कपूर सिंह ने १९४७ में पंजाब के हिन्दू मुख्य मंत्री चंदू लाल त्रिवेदी द्वारा जारी सरकारी आदेश को प्रकट करके खलबली मचा दी थी जिसमें अक्टूबर १९४७ में इस मुख्य मंत्री ने नेहरू व पटेल से दिशा निर्देश लेकर ही यह आदेश पत्र संयुक्त पंजाब के सभी जिलाधिकारियों को जारी किया था !

इस आदेश पत्र के अनुसार सिख जरायमपेशा क़ौम घोषित की गई थी और पंजाब के समस्त जिलाधिकारीयों से इनसे पूरी सख्ती से पेश आने के निर्देश भी दिए गए थे! भारत सरकार शायद यह भूल गई थी कि ये सभी विस्थापित अपनी कीमती जायदाद, खेत-खलिहान, उपजाऊ जमीनें, प्रफुल्लित व्यवसाय और सुंदर घर- बार छोड़ कर अपने ही देश में विस्थापित या रिफ्यूजी कहलाये थे!

और इस सिख क़ौम को जिसने बिना कोई राजनीतिक समझौता किये ही अपनी किस्मत भारत से जोड़ ली थी, इस कृतघ्न समुदाय ने आज़ादी प्राप्ति के कुल दो महीनों में ही अपना सही रूप उजागर कर दिया था!

तो क्या भारत सरकार आज भी इस आदेश का अनुपालन कर रही है और क्या इसी आदेश के तहत ही भारतीय न्यायिक व्यवस्था को गुप्त आदेश दिए गए हैं कि किसी भी अपराध में सिख युवक को संलिप्त पाये जाने पर जेल भेज दो?

लगता तो यही है!

कुछ दिन पहले एक केस के संबंध में मेरा तीस हज़ारी अदालत में जाना हुआ! मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में एक युवा सिख को पेश किया गया! जुर्म था सड़क पर मामूली मार पीट और दूसरी पार्टी गायब थी ! जज ने उस सिख युवक को देखते ही पुलिस वाले से कहा, “अरे तू कैसा पुलिस वाला है, इसे दो-चार हाथ लगाता और तब लाता अदालत में!”

मैं उस जज को अवाक देखता रह गया ! उस जज ने उसे बिना उसकी कोई बात सुने ही पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया!

मैं तो खैर इस भारतीय न्यायिक व्यवस्था के न्याय के नाम पर किये जाने वाले ड्रामे पिछले ३१ साल से देख ही रहा हूँ, इसलिए इस जुल्म को देखकर मेरा विश्वास इस न्यायिक व्यवस्था से पूर्ण रूप से उठ चुका है! इस से मैं किसी न्याय की अपेक्षा नहीं करता!Ajmer kesri

Ajmer Singh Randhawa

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