इंदौर की चंडाल चौकड़ी

स्वार्थ सिद्धि के लिए धर्म को बेच देने वाले इन महानुभावों से मिलिए!

ये हैं:-

Manjit Singh alias Rinku Bhatia
१- मंजीत सिंह उर्फ़ रिंकू भाटिया जो शराब के एक बड़े व्यवसायी हैं अपने काले धंधों पर पर्दा डालने के लिए इन्हें सिख धर्म का सुरक्षा कवच चाहिए,

Inderjit Khanuja
२- इंद्रजीत खनूजा- ये भी रिंकू भाटिया के परम् सहयोगी हैं, आश्चर्य तो यह है कि कभी इनका कोई लेख नहीं छपा फिर भी इन्हें मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार (मुख्य मंत्री शिवराज चौहान) द्वारा पंजाबी साहित्य अकादमी का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया, क्यों?

Jasbir Gandhi
३- जसबीर गाँधी उर्फ़ राजा गाँधी, ये इंदौर गुरुद्वारा सिंह सभा के सेक्रेटरी हैं और रिंकू भाटिया के परम् सहयोगी,

Amarjit Bhalla

४- अमरजीत सिंह भल्ला उर्फ़ अमरीक भल्ला- ये महानुभाव मध्य प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन एवं मेंबर सेक्रेटरी भी हैं !

आइये अब इस चंडाल चौकड़ी जो दुर्भाग्यवश सिख धर्म से ही संबंधित हैं, अपने निजी स्वार्थ सिद्ध करने हेतु इनके सिख धर्म के विरोध में सिख विरोधी, हिन्दू कटटरवादी संस्था राष्ट्र्य स्वयंसेवक संघ को हर संभव मदद करने के आरोप हैं!

उदाहरण के लिए इंदौर के राज मोहल्ला में ५० वर्ष से पुराणी एक इमारत जो शायद २००१ से जिसकी ऊपरवाली दो मंजिलें गुरुद्वारा में बदल दी गयी थीं और जहां पूर्ण सिख रहत मर्यादा का पालन करते हुए सिख धर्म से संबंधित धार्मिक कार्यों द्वारा सिख बच्चों को धार्मिक शिक्षा तथा कीर्तन आदि का ज्ञान करवाया जाता था, लाइब्रेरी थी जिसमें सिख धर्म से संबंधित पुस्तकें भी थीं, यानि कि एक निजी संस्थान द्वारा संपूर्ण धार्मिक कार्य अंजाम दिए जाते थे! इतने वर्षों में यहाँ अनगिनत धार्मिक कार्यों को अंजाम दिया गया, न जाने कितने कथावाचक आये, कीर्तन करने वाले आये, सिख इतिहास की जानकारी देने वाले आये, अनगिनत सिख प्रचारक आये, देश विदेश से सिख श्रद्धालु आये, सभी ने भाई रतीन्द्र सिंह जी की सिख धर्म प्रति की गयी सेवाओं की श्लाघा (प्रशंसा) ही की है!

इसके संचालक भाई रतीन्द्र सिंह जी हैं जिनके दादा जी के नाम पर यह गुरुद्वारा करतार कीर्तन कहलाता था और लगभग १०० या इससे ऊपर रोज़ाना सिख संगत इस गुरूद्वारे में हाज़री भरती थी! परन्तु भाई रतीन्द्र सिंह आरएसएस के लिए एक कांटा थे क्योंकि वे इस सिख विरोधी संगठन को कभी भी, किसी भी सिख विरोधी कार्य-कलाप में सफल नहीं होने देते थे! अत: उन्हें सबक सिखाने के लिए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने स्मार्ट सिटी योजना का सहारा लेकर सबक सिखाने की सोची!

इंदौर शहर को स्मार्ट सिटी योजना के तहत सड़कें चौड़ी करने का काम शुरू किया गया जिससे इस गुरूद्वारे को निशाने पर लिया जा सके! गुप् चुप रूप से इस प्लान नई अंजाम देने का कार्य शुरू किया गया जिसकी कोई लिखी पूर्व सूचना गुरुद्वारा प्रबंधन को कभी भी नहीं दी गई! लेकिन गुप्त सूत्रों से इस जानकारी के प्राप्त होने पर गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उच्च न्ययालय में रिट दाखिल की गई जिस पर उन्हें स्टे भी प्राप्त हुआ, अगली ५ मई को इसकी अगली सुनवाई होनी थी लेकिन २२ अप्रैल को ही इंदौर म्युनिसिपल कार्पोरेशन द्वारा बुलडोज़र चलवा कर इस पवित्र गुरूद्वारे को जमींदोज़ कर दिया गया! इसके लिए विशेष दिन भी चुना गया शनिवार जब यहाँ सिख संगत मौजूद होती है और जिससे शहर में भाजपा की कार्रवाई का आतंक फैले!

ठीक उसी तरह जैसे दरबार साहिब अमृतसर पर फौजी कार्रवाई के लिए सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस को चुना गया था जिस दिन गुरूद्वारे में अधिक उपस्थिति होती है!

इसी गुरूद्वारे से चंद कदम दूर ही हनुमान मंदिर है जिसे कोई क्षति नहीं पहुंचाई गयी, यही सड़क अंत में गणपति मोड़ पर समाप्त होती है जहां गणपति मंदिर भी है जो सड़क चौड़ीकरण में बाधा था लेकिन इसी गणपति मंदिर को बचाने के लिए प्लान में बदलाव किया गया, इस मंदिर के दूसरी ओर अधिक तोड़ फोड़ करके सड़क तो पूरी ले ली गयी लेकिन थोड़ा घुमाव दे दिया गया जिससे मंदिर को कोई क्षति न पहुंचे!

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इस कार्रवाई के बाद हमने इंदौर शहर की उन सभी सड़कों का दौरा किया जहां प्रशासन द्वारा मार्ग चौड़े किये गए थे! हम यह देखकर आश्चर्य चकित रह गए कि कहीं भी, किसी भी मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गयी थी चाहे वह मंदिर कितना ही छोटा या बड़ा क्यों न रहा हो, प्रमाण के लिए हमने इन सभी मंदिरों की वीडियो ग्राफ़ी भी कर ली थी!

खैर मुगल राज में मंदिर तोड़े जाते थे, मस्जिद बनवाई जाती थीं, उन्हीं के पद चिन्हों पर चलते हुए इस देश की सरकार भी हिन्दू संगठनों को खुश करने, हिन्दू राष्ट्र निर्माण हेतु सिख गुरुद्वारों तथा मस्जिदों को तोड़ कर अपना अल्पसंख्यक विरोधी चेहरा प्रदर्शित कर रही है!

अब हम इंदौर के इन सिख नेताओं की चंडाल चौकड़ी पर भी कुछ बात कर लें!
* इन्हें भगवान ने ऑंखें दी हैं लेकिन ये फिर भी अंधे हैं क्योंकि निजी स्वार्थों की चाहत ने इन्हें अँधा कर रखा है,
* इनकी दोनों टाँगें सलामत हैं लेकिन फिर भी सर उठा कर चलने के लिए इन्हें बैसाखी चाहिए और सिख विरोधी हिन्दू कटटर संगठन आरएसएस तथा भाजपा इनकी बैसाखी हैं, यदि वे आज अपनी बैसाखी खींच लें तो ये धड़ाम से धरती पर गिर पड़ेंगे (ये शराब माफिया से संबंधित हैं, इसलिए अपने व्यवसाय को प्रफुल्लित करने के लिए इन्हें राज्य सरकार और राजनीतिज्ञों का सहारा चाहिए,
* इनके पास दिमाग भी है लेकिन फ़िलहाल राज्य सरकार के पास गिरवी है, फिर भी ये आसमान में उड़ते हैं! जिस दिन भाजपा या आरएसएस ने उनके पर कतर दिए, इन्हें पैर टिकाने के लिए ज़मीन भी नहीं मिलेगी!

इस चंडाल चौकड़ी ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग के लैटर हैड पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारो की जिस पर न तो जारी करने की तारीख, सीरियल नंबर, न ही किसी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं फिर भी केवल उनके नाम और पद लिख कर इसे जारी कर दिया गया जबकि राज्य अल्पसंख्यक आयोग को प्रेस विज्ञप्ति देने का कोई अधिकार नहीं है, वह केवल किसी जांच रिपोर्ट को सार्वजानिक कर सकता है!

आश्चर्य तो यह है कि यही व्यक्ति असल में अमरजीत सिंह भल्ला है जिस का ग्वालियर में एक बड़ा अस्पताल भी है जिसे सहारा अस्पताल के नाम से जाना जाता है लेकिन प्रेस विञप्ति में इसे अमरीक भल्ला बता कर इसकी असली पहचान छुपा दी जाती है! यह भी सुनने में आया है इस अस्पताल में हर तरह के दो नंबर के काम होते हैं लेकिन प्रशासन से सांठ गाँठ होने के कारण इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती, लोग भी इनके खिलाफ मुंह खोलने से डरते हैं!

अब न तो किसी जाँच का आदेश इस अल्पसंख्यक आयोग द्वारा दिया गया न ही कोई जाँच हुई लेकिन फिर भी आरएसएस के गुर्गों को (इंदौर म्युनिसिपल कार्पोरेशन) को यह व्यक्ति अपनी तरफ से ही क्लीन चिट जारी कर देता हैं जबकि इस अमरजीत भल्ला ने इंदौर की सिख संगत को गुरुद्वारा करतार कीर्तन से मिली शिकायत की जांच करने के लिए ५ मई का समय दिया था और आज ४ मई को इसने कहा है कि वह १३ मई को आएगा!

अब इंदौर म्युनिसिपल कार्पोरेशन ने गुरुद्वारा तो तोड़ ही दिया है, अब इसके आने या न आने से हमें क्या फर्क पड़ना लेकिन चांडाल चौकड़ी ने अपना काम बाखूबी अंजाम दिया और मोहन भगवत इनसे प्रसन्न अवश्य हुए होंगे!

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भगवान ही इन्हें सद्बुद्धि दे!

ajmer-kesri
अजमेर सिंह रंधावा !

3 thoughts on “इंदौर की चंडाल चौकड़ी”

  1. Waheguru ji ka khhalsa Waheguru ji Ki fateh…
    Sikkh itihas naal chhedchaad. .. Sikkh Roop naal chhedchhad… Presant aur past dona vch badal k dikhaun Di sazish kar k rss Sikkha naal badkhoyi kr riya h.. Kutta kann Na lai ja sake.. Sannu apne Sidhanta da apni riyasat apni paneeri apne Guru ghara da khyaal aap rakhna chahida h..
    Fateh ji..

  2. very unfortunate. these sikhs should be declared tankhaya by SGPC and socially bycotted. This brand of sikh leaders is now available in All cities and leaders will sell their mothers also for money what to talk of Sikhi to RSS. we have clear example of Badals in Punjab and now we Will see the act being repeated in Delhi as our relegious leaders are BJP members. They will have to follow the dictates of BJp and RSS.The sangat should select new leaders to stop onslaught of RSS.

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