सिकलीगर सिखों की सारी मुसीबतों की जड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ?

हैं आश्चर्य चकित करने वाली खबर कि सिकलीगर सिखों की सारी  मुसीबतों की जड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही है?

जी हाँ यही कटु सत्य है!

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पिछले कुछ समय से इन गरीब सिकलीगर परिवारों पर पुलिसिया कहर की ख़बरें अख़बारों में रही थीं लेकिन कोई पुख्ता जानकारी हासिल नहीं हो पा रही थी! भारत के अख़बार वालों को या मीडिया को तो सिर्फ मसाला चाहिए, वे विदेशी पत्रकारों की तरह किसी खबर की तह तक नहीं जाते! परन्तु उनकी खबरें किसी निर्दोष को अपराधी अवश्य घोषित कर देती हैं!

हम भी कुछ समय खबरों के पीछे छुपे कारणों का पता लगने तक शांत रहे लेकिन मन काफी उद्वेलित रहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि ६५० सिख युवकों पर हथियार बनाने के मुकदमें दायर कर दिए जाएँ और उनकी गिरफ्तारियां शुरू कर दी जाएँ?

उधर इंदौर में ही गुरुद्वारा करतार कीर्तन को तुड़वाने में भी इसी हिन्दू कटटरवादी संगठन RSS का नाम रहा था! उस से संबंधित तथ्यों को एकत्रित करना और फिर राष्ट्रीय सिख संगत के कतिपय क्षेत्रीय नेताओं के हाथ होने के भी सबूत मिले जिन्होंने व्यक्तिगत दुश्मनी निकलने के लिए मौका देख अपने आकाओंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साथ दिया?

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इस से बड़ी निंदनीय और शर्मनाक घटना किसी सिख के लिए और क्या हो सकती है कि वह सांसारिक उपलब्धियों या सुखों को प्राप्त करने के लिए अपने चारित्रिक पतन का परिचय दे?

डूब मरना चाहिए उन्हें जो अपने गुरु से ही धोखा करते हैं!

इन बेचारे गरीब सिकलीगर सिखों (सिकलीगर का अर्थ हैकच्चे लोहे को तपा कर आकार देने, सुदृढ़ करने और चमका देने वाला तथा हथियारों को तेज़ धार देने वाला कारीगर) को तो हथियार बनाने के जुर्म में अपराधी घोषित कर दिया गया लेकिन यदि ये या अन्य जो भी व्यक्ति हथियार बनाते हैं, उनके बनाये हथियार खरीदता कौन है? कौन है जो उन्हें कच्चा माल खरीदने के लिए पैसे दे और उनके द्वारा बनाये गए हथियार ले जाये? अगर एक व्यक्ति एक दिन में १० हथियार बना देता है तो एक दिन में लगभग ६५०० हथियार तैयार होते हैं, तो कौन हैं इन हथियारों के ये बड़े खरीदार?

तब हमें पता चला कि इन हथियारों को RSS खरीदती है! लेकिन पिछले वर्षों से इन सिख कारीगरों ने अब हथियार बनाना बंद कर दिए हैं, इसकी अपेक्षा वे ड्राइवर या गुरुद्वारों में सेवादारी वगैरा करके अपने परिवार का पेट पालते हैं!

इससे RSS को बहुत क्षति पहुंची है, इनके हथियार अत्यंत उत्तम कोटि के होते हैं, इन्होने ने सिख गुरुओं को हथियार बना कर दिए, सिख फौजों को भी हथियार बना कर दिए जिससे अब्दाली जैसे निरंकुश हत्यारे शासकों को सिख फौजों ने पस्त कर दिया था, इनके बनाये हथियारों से ही सिख फौजों ने काबुल कंधार तक फतह हासिल की, लदाख, कश्मीर जीता, चीन तक दहला दिया लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद अपने घर में ही उपेक्षित करार दे दिए गए!

ये गुरु के परम् शिष्य हैं, इन्हें सिख धर्म के बारे जानकारी देने और और सुस्थापित करने के लिए कुछ जागरूक सिख संस्थाएं आगे आईं जिनमें प्रमुख है इंग्लैंड की ब्रिटिश सिख काउन्सिल! इस संस्था ने इनके लिए पानी के प्रबंध के लिए बोरवेल खुदवाये, स्वच्छ पानी मुहैय्या करवाया, गुरूद्वारे बनवाये, बच्चों को शिक्षित करना प्रांरभ किया, मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध करवाई गयीं और इनके जीवन स्तर को उठाने के लिए, अच्छे नागरिक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किये गए जिससे प्रेरित होकर इन सिकलीगरों ने अपने पुश्तैनी धंधे को तिलांजलि दे दी!

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Sikligar arrests

Sikligar

इससे RSS  जैसे कटटर हिन्दू संगठन उद्वेलित हो उठे और इन गरीब सिखों को ब्लैक मेल करने के लिए इन पर दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया, इसी कड़ी में इन पर झूठे मुकदमें दर्ज़ करवा दिए गए और ये डर के मारे घर बार छोड़ जंगलों में जा छिपे!

जब कोई हल निकला तो पहले तो इनके परिवारों ने सिख धर्म छोड़ने की बात की क्योंकि मध्य प्रदेश की पुलिस इनके दाढ़ी और केश तथा पगड़ी देख कर इन्हें अपराधी समझ बैठती है! परन्तु पंजाब के तथा अन्य राज्यों के सिखों को जब सच्चाई का पता चला तो सिख समाज में आक्रोश फ़ैल गया और फिर सिख संस्थाओं ने अपने प्रतिनिधि भेज कर स्थिति की जानकारी ली और इन परिवारों की सहायता के लिए कमर कस ली! श्री अकाल तख़्त तक शिकायत पहुंची तो दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी ने भी अपने प्रतिनिधि भेजे!

भारतीय मीडिया भले ही खामोश रहा हो क्योंकि यह जुल्म सिखों के साथ हो रहा था और करने वाले थे कटटर हिन्दू!

लेकिन पंजाबी पत्रकार खामोश नहीं बैठे! पंजाब की शायद ही कोई पत्रिका हो या अख़बार हो जिसने मध्य प्रदेश सरकार की भर्त्स्ना की हो या RSS  को नंगा किया हो?

अब देखना है कि मध्य प्रदेश सरकार क्या रुख लेती है, टकराव का या सत्य का साथ देने का? सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी तथा अकाल तखत भी उदासीन नहीं रह सकते! और दिन में स्थिति के और स्पष्ट होने के आसार हैं, तभी कहा  जा सकेगा कि यह स्थिति क्या १९८४ से भिन्न है या इसकी पुनरावृत्ति?

ajmer-kesri

अजमेर सिंह रंधावा !

भारत में गुरुद्वारों को ही निशाना क्यों?

कृपया अपनों से बचें!

Lucche

मृत अकाली दल को पुन: जीवन दान देने के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC ) ने गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी हरिद्वार के पुन: निर्माण हेतु सिख समाज से सहयोग माँगा है जबकि इनकी असलियत तो देखिये कि गुरुद्वारा करतार कीर्तन इंदौर जिसे २२ अप्रैल २०१७ को इंदौर नगर निगम ने तोडा है, उसको बचाने के लिए इस समिति ने कोई प्रयत्न नहीं किये जबकि इसकी लिखित पूर्व सूचना २०१६ को ही इन्हे दे दी गयी थी और गुरूद्वारे को बचाने के लिए इनसे सहयोग की अपील भी की गयी थी!

मंजीत सिंह GK ने २६ दिसंबर को ही एक खत इंदौर की मेयर को लिख दिया था कि बिना गुरुद्वारा प्रबंधन समिति करतार कीर्तन के गुरुद्वारा को न तोडा जाये लेकिन इतने से ही इन्होने इन्होने अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली, इसको फॉलो अप  नहीं किया और न ही इसकी बाबत इंदौर नगर निगम पर कोई दबाव बनाया जबकि ये भाजपा के सहयोगी हैं और सही मायने में तो भाजपा व् RSS के लिए ही काम करते हैं! इसके बाद इन्होने चुप्पी धारण कर ली!

Approach to DSGMC
२६ दिसंबर २०१६ से २२ अप्रैल तक ४ महीने ये कुंभकर्ण की नींद सोते रहे और इस गुरूद्वारे को टूटने से बचाने के लिए इस दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने कोई प्रयत्न नहीं किये और चले हैं गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी, हरिद्वार का पुन: निर्माण करने?

अफ़सोस समय रहते इन्होने कोई कार्रवाई नहीं की, यदि की है तो प्रमाण पेश करें! इनकी चुप्पी ही इनके निकम्मेपन और लापरवाही की पुष्टि करती है!

इसके पूर्व गुरुद्वारा करतार कीर्तन प्रबंधन द्वारा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से भी सहयोग की अपील की गयी थी! जिसके प्रत्युत्तर में जगजीत सिंह विर्दी, मीडिया अडवाइज़री नरेंद्र मोदी के द्वारा शिवराज चौहान को सूचना देते हुए गुरुद्वारा करतार कीर्तन को बचाने में उनसे सहयोग की अपेक्षा भी की गयी थी लेकिन शिवराज चौहान द्वारा इस गुरूद्वारे को बचाने में कोई भूमिका अदा नहीं की गयी!

Letter

इंदौर नगर निगम ने जितनी भी सड़कें चौड़ी कीं, उन पर स्थित किसी भी मंदिर को फ़िलहाल तक कोई क्षति नहीं पहुंचाई गयी, चाहे मंदिर छोटा रहा हो या बड़ा! इन मंदिरों में बिजली भी कटिया डाल कर ली जा रही है, सभी मंदिर अवैध कब्ज़े करके बनाये गए हैं जबकि गुरुद्वारा साहिब की वैध रजिस्ट्री मौजूद है, टैक्स भी अदा किया जाता है, बिजली के बिल अदा किये जाते हैं, फिर भी हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ये मंदिर सुरक्षित छोड़ दिए गए,सिख समाज की धार्मिक भावनाओं की कोई परवाह नहीं की गयी !

हमारे पास पूरे इंदौर शहर की हर सड़क की वीडियो ग्राफी मौजूद है!

सत्य तो यह है कि गुरुद्वारा करतार कीर्तन को भी जान बूझ कर तोडा गया ! किसी अपील पर कोई सुनवाई नहीं की गयी ! ठीक वैसे ही जैसे अमृतसर गुरूद्वारे पर १९८४ के फौजी आक्रमण से पहले ज़िद्दी इंदिरा ने किसी की नहीं सुनी थी!, अमेरिका के कुछ सिख बुद्धि जीवियों ने इंदिरा को फरवरी ८४ में ही एक पत्र लिख कर ऐसी किसी कार्रवाई को करने से सावधान किया था लेकिन अड़ियल इंदिरा नहीं मानी और आज भी इस आक्रमण की कड़वाहट बाकी है जबकि इंदिरा ने अपनी जान दे कर इसकी कीमत चुकाई थी!

न जाने भारत सरकार सिखों को परेशान करने, व्यथित करने और उनमें असुरक्षा की भावना क्यों पैदा करना चाहती है, इससे भारत सरकार का या हिन्दू समाज का क्या हित साधन होगा? या वे शायद ऐसी कार्रवाइयां करके सिखों का मनोबल तोडना चाहते हैं तो वे भूल जाएँ, हम सौ साल बाद भी भूलने वाले नहीं हैं!

बाकी सिख समाज दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी पर जरूरत से अधिक विश्वास न करें क्योंकि वे सिर्फ सुखबीर बादल या प्रकाश सिंह बादल के लिए काम करते हैं न कि सिख समाज की भलाई के लिए!
कृपया अपने अंदर और बाहर के दुश्मनों से सावधान रहें! जो नुकसान इंदौर की RSS समर्थक चांडाल चौकड़ी ने गुरुद्वारा करतार कीर्तन को पहुँचाया है उससे सिख समाज को राष्ट्रीय सिख संगत को समर्थन देने वाले सिखों का बायकाट कर देना चाहिए! अकाल तख़्त को भी सख्त कदम उठाने चाहियें!

दिल्ली कमिटी भी RSS तथा भाजपा समर्थक है, यह सिखों की सगी कभी नहीं हो सकती! इनका असली चेहरा पहचानने की जरूरत है, हालांकि सिख समाज ने हालिया हुए म्युनिसिपल कार्पोरेशन के चुनाव में देख ही लिया है कि किस तरह ये भाजपा की गोद में जा बैठे हैं? जिन्हें सिखों ने एक विश्वास से चुनकर, अपने कीमती वोट दे कर कमिटी की सदस्य्ता दिलवाई, वे सिखों के विश्वास को तोड़कर सिख विरोधियों से जा मिले!

क्या और किसी रहस्योद्घाटन की अभी भी आवश्यकता है?

ajmer-kesri

अजमेर सिंह रंधावा !

इंदौर के शैतान-RSS के गुलाम सिख

कुछ दिन पहले ही गुरुद्वारा करतार कीर्तन को इंदौर नगर निगम द्वारा तोड़े जाने पर सिख समाज से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गयी थीं! मैंने भी इसकी विस्तृत जानकारी ली तो पाया कि जहां इंदौर नगर निगम, मध्य प्रदेश सरकार, भारत सरकार तथा इनके आका आरएसएस के मोहन भागवत का इस गुरूद्वारे के तोड़े जाने में हाथ है वहीँ इनके हाथों के खिलौने बने कुछ महत्वाकांक्षी सिख (जिनका सीधा संबंध RSS से है) भी इसमें शामिल हैं!

Indore ke shaitan

Indore ke shaitan-1

है तो यह सत्य लेकिन कितना घिनावना कि एक गुरूद्वारे को तोड़ने में इतने महत्वपूर्ण लोगों, सम्मानित हस्तियों तथा स्वयं राज्य सरकार तथा भारत सरकार का भी हाथ होना महसूस किया जाये तो कितना आश्चर्य लगता है! इंदौर नगर निगम, मध्य प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार, ये तीनों भाजपा शासित हैं  और ये सिख विरोधी तथा भारत के अल्पसंख्यकों के कटटर विरोधी RSS द्वारा रिमोट संचालित हैं, RSS के निर्देश, ये तीनों तुरंत स्वीकार करते हैं!

गुरुद्वारा करतार कीर्तन, ५० वर्ष पुरानी ईमारत का एक हिस्सा था, इसकी बाकायदा रजिस्ट्री है, प्रॉपर्टी टैक्स दिया जाता है, बिजली बिल अदा किया जाता है न कि इंदौर के मशरूमों की तरह उग आये मंदिरों की तरह जो हर सड़क के मध्य, हर चौक पर तथा फुटपाथ को घेरे रहते हैं, कटिया डाल कर मुफ्त की बिजली लेते हैं, कोई प्रॉपर्टी टैक्स नहीं देते ! इनमें से किसी भी मंदिर को चाहे वह छोटा हो या बड़ा, किसी को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गयी, (हमने इन सभी मंदिरों की वीडियोग्राफी भी करवा ली है)! फिर भी गुरूद्वारे को ही निशाना क्यों बनाया गया?

गुरुद्वारा करतार कीर्तन के संचालक हैं भाई रतीन्द्र सिंह जिनका सिख समाज में बहुत नाम है, गुरसिख हैं तथा सिख समाज पर किसी भी तरह के अंदरूनी या बाहरी हमले का वे अपनी विद्वता से भरपूर विरोध करते हैं! RSS जैसे कटटर हिन्दू संगठन में भी उनकी वजह से बौखलाहट पैदा हो गयी थी! RSS की किसी भी सिख विरोधी कार्रवाई का वे डट कर सामना करते था, इतना सिख विद्वान RSS के प्रबंधकों की आँखों का कांटा बन गया था अत: इन सभी ने मिलकर भाई रतीन्द्र सिंह जी को सबक सिखाने की सोची और इसके लिए मध्य प्रदेश की राज्य सरकार, इंदौर नगर निगम ने मिलकर स्मार्ट सिटी योजना के तहत इंदौर को लेकर इस की सड़कें चौड़ी करने का प्लान तैयार किया, जिससे इस गुरूद्वारे को तोड़ भी दिया जाये और RSS के बिकाऊ सिखों द्वारा इस अनुचित कार्रवाई को सही भी ठहरा दिया जाये! इस गुप्त प्लान की जानकारी गुरुद्वारा प्रबंधन को नहीं दी गयी लेकिन गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर भाई रतीन्द्र सिंह जी ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखा तथा है कोर्ट से गुरूद्वारे को तोड़े जाने के खिलाफ रोक का आदेश भी पारित करवा लिया गया!

मध्य प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग ने भाई रतीन्द्र सिंह जी को सूचना दी की वे ५ मई को गुरुद्वारा तोड़े जाने संबंधी मामले की सुनवाई करेंगे लेकिन २२ अप्रैल को ही नगर निगम इस गुरूद्वारे को तुड़वा देता है, अधिकारी न तो हाई कोर्ट के रोक के आदेश को मानते हैं न ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा किसी सुनवाई के इंतज़ार की कोई जरूरत महसूस करते हैं!

और जब सिख समाज ने पाया कि सड़कें तो और भी चौड़ी की गयीं लेकिन मंदिर जस के तस हैं तो संपूर्ण इंदौर की सड़कों की विडिओग्राफी भी की गयी और सर्वेक्षण भी! इसी राजमोहल्ला की मुख्य सड़क जहां गुरुद्वारा तोडा गया, यह सड़क आगे जाकर गणपति चौक पर निकलती है और फिर सीधा राजवाड़ा की ओर चली जाती है! हम आश्चर्यचकित रह गए जब हमने देखा कि गणपति मंदिर जो चौक पर ही बना है, उसको बचने के लिए प्लान को ही बदल दिया गया था! यह सड़क दोनों ओर से ३०-३० फ़ीट चौड़ी की गयी थी लेकिन गणपति मोड़ पर आकर इस को घुमाव दे दिया गया और दोनों और ३०-३० फ़ीट तोड़ने की अपेक्षा इंदौर निवासियों पर कहर बरपा दिया गया, गणपति मंदिर के दूसरी और ६० फ़ीट सड़क नाप ली गयी और उसे एक तरफ के घर गिरा कर सड़क की पूरी चौड़ाई ले ली गयी, ऐसा ही गणपति मोड़ को पार कर राजवाड़ा जाने वाली सड़क के प्रारंभ में दुहराया गया और वहां भी एक ही ओर से ६० फ़ीट ज़मीन ले ली गयी!

अब सोचिये कि ६० फ़ीट की गहराई तक जिनके घर टूटे होंगे, उनके घरों में क्या बचा होगा? उन पर तो गरीब मार कर दी गयी, गणेश जी को भले ही लड्डू भोग लगाते रहो, चढ़ाते रहो?

मध्य प्रदेश  अलप संख्यक आयोग की लापरवाही देखते हुए हमने इंदौर के जाने माने सिख चेहरों को खंगालना शुरू किया तो पाया कि वे सभी राष्ट्रीय सिख संगत (जो RSS द्वारा सिखों को हिन्दू साबित करने के मक़सद से RSS द्वारा ही कुछ सिखों को खरीद कर, उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने और सिख धर्म के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है, इसके एक अध्यक्ष रुलदा सिंह की सिख विरोधी कार्रवाइयों के चलते हत्या भी की जा चुकी है) से संबंधित हैं! इसके सदस्य डाक्टर अमरजीत सिंह भल्ला, को जो सहारा अस्पताल, ग्वालयर के मालिक, एवं निदेशक भी हैं, को २ जनवरी २०१७ को मनोनीत किया गया था, ये राष्ट्रीय सिख संगत से संबंधित हैं, जिसके सबूत भी हम तस्वीरों के माध्यम से दे रहे हैं! इन्होने गुरुद्वारा तोड़े जाने पर एक प्रेस विञप्ति जारी की थी, जिस पर इनके या किसी अन्य अधिकारी के न तो हस्ताक्षर ही हैं और न ही कोई क्रमांक नंबर, न ही जारी करने की तारीख!

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इन बिकाऊ सिखों के RSS के द्वारा संचालित किसी भी प्रोग्राम में इनके शामिल होने पर इंदौर के सिख संगठनों तथा भाई रतिंदर सिंह जी द्वारा विरोध भी किया गया था, इस संबंध में अकाल तख्त से निर्देश भी हैं कि RSS सिख विरोधी है और सिख समाज को इससे दूर रहना चाहिए लेकिन यह चंडाल चौकड़ी फिर भी नहीं मानी!

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अकाल तखत द्वारा RSS के विरुद्ध जारी किया गया हुकमनामा 
फिर हमने और खोज की तो इस सिख चंडाल चौकड़ी के सिख विरोधी RSS से गहरे संबंध उजागर हुए! आप ही इन तस्वीरों को देखिये जो स्वयं ही अपने आप इनका खुलासा करती हैं!

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यह चंडाल चौकड़ी सिख धर्म से संबंधित किसी भी प्रायोजित कार्यक्रम में RSS के ही वक्ताओं, नेताओं और प्रतिनिनिधियों को आमंत्रित करती है जैसे कि डाक्टर अमरजीत सिंह भल्ला, जो कि राज्य अल्प संख्यक आयोग के मनोनीत सदस्य हैं, लेकिन अपने को चेयरमैन लिखते हैं! इन्होने २०१५ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष होते हुए विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष कट्टर हिंदूवादी, मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक विरोधी प्रवीण तोगड़िया को आमंत्रित किया! उनका स्वागत तो हिन्दू धार्मिक रीति से तिलक लगा कर किया गया लेकिन अमरजीत सिंह भल्ला इस चमचागिरी में कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने भी अपने माथे पर तिलक लगवा कर अपने को हिन्दू साबित किया!

सबूत देखें;

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ये महानुभाव भी अपने काळा धंधों को सफेद करने के लिए इस कटटर हिंदूवादी संगठन RSS (राष्ट्रीय सिख संगत) के लिए काम करते हैं! इन्होने भी RSS की पत्रिका संगत संसार के प्रसार एवं प्रचार के लिए अपने को तन-मन-धन से समर्पित कर रखा है! इस मैगज़ीन की एक प्रतिलिपि, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज चौहान को भेंट करने वे अपने RSS के अन्य सहयोगियों के साथ पहुंचे व् नतमस्तक होकर अपनी आस्था RSS में जताई जिससे इन्हें पंजाबी साहित्य अकादमी के चेयरमैन बने रहने का सौभाग्य प्राप्त हो सके, मुख्य मंत्री का वरद हस्त प्राप्त हो, भले ही साहित्यिक क्षेत्र में इनका अपने योगदान नगण्य हो!
आप स्वयं देखिए;

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खनूजा जैसे गिरे हुए चरित्र के व्यक्ति, राजनीतिक गलियारों में पहुँच बनाये रखने के लिए नीच से भी नीच लोगों का सहारा लेने में संकोच नहीं करते, धर्म तो इनके लिए एक सीढ़ी है जिससे ये अपनी राजनीतिक महत्व आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं! इस निम्न तस्वीर में इंद्रजीत खनूजा राष्ट्रीय सिख संगत के अध्यक्ष गुरचरण गिल के साथ दिखाई दे रहे हैं;

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मंजीत सिंह उर्फ़ रिंकू भाटिया भी इसी जुंडली का एक हिस्सा हैं! ये शराब व्यवसायी हैं ! बहुत ही चरिवान एवं गुणी व्यक्ति हैं जिनके जीवन का एक ही ध्येय है कि  येन-केन-प्रकारेण मध्य प्रदेश के प्रत्येक घर के कम से कम एक व्यक्ति को शराब अवश्य सेवन करनी चाहिए जिससे दिन भर की थकान महसूस न हो! इस महान कार्य के लिए चाहे इनके गुरुओं का निरादर भी हो तो भी इन्हें स्वीकार है! इस निम्न तस्वीर में देखिये कि कैसे गुरु नानक देव जी महाराज को कतिपय नेताओं तथा भगत सिंह के समकक्ष सुशोभित कर दिया है लेकिन इन्हें अपने को राष्ट्रीय सिख संगत के साथ जुड़े होने पर गर्व महसूस होता है!

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आश्चर्य होता है कि गुरुद्वारा टूटने पर भी इन मरी हुई ज़मीर वाले सिखों के मन आहत नहीं होते अपितु फिर भी निजी स्वार्थों की लालसा पूर्ति के लिए ये आज भी हिन्दू कटटरवादी, सिख विरोधी संगठन के साथ मिल कर अपने ही धर्म को हानि पहुंचा रहे है तो क्या इन्हें आस्तीन के सांप नहीं कहा जाना चाहिए?

गुरु के सिख तो ये कदापि नहीं?

ajmer-kesri

अजमेर सिंह रंधावा

 

इंदौर की कथित चंडाल चौकड़ी का एक कारनामा और देखिये

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मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ०२/०१/२०१७ को एक आधिकारिक सूचना द्वारा डाक्टर अमरजीत सिंह भल्ला, जो कि ग्वालियर के सहारा अस्पताल के एकमात्र मालिक, निदेशक एवं नाक, कान व् गला विशेषज्ञ (ENT Specialist) हैं, को मध्य प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का सदस्य घोषित किया! इस आदेश की आधिकारिक प्रतिलिपि (Gazette notification) नीचे दी जा रही है!

Gazette notificationMP govt

लेकिन जब इस अमरजीत भल्ला ने गुरुद्वारा करतार कीर्तन तोड़े जाने पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की तो इस विज्ञप्ति पर इन्हें अमरीक भल्ला कैसे लिखा गया? यह एक विचारणीय प्रश्न है?

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इस पत्र को जारी करने की कोई तिथि नहीं दी गयी है, न ही इसे कोई क्रमांक दिया गया है और अमरजीत भल्ला को न केवल अमरीक भल्ला लिखा गया अपितु उन्हें मध्य प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन एवं मेंबर सेक्रेटरी बताया गया है,इस पत्र पर किसी भी अधिकारी के कोई हस्ताक्षर भी नहीं है लेकिन इसे मध्य प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की वेबसाइट पर भी जारी कर दिया गया है!

अब व्यक्ति एक है लेकिन जिसके दो चेहरे एवं दो पद हैं,इनमें से असली कौन है! क्या एक सदस्य स्वयं को चेयर मैन भी बताये, सदस्य भी तथा सेक्रेटरी भी,तो शंकाएं उठनी स्वाभाविक ही है?

आखिर यह व्यक्ति अमरजीत भल्ला है या अमरीक भल्ला?

कौन है ये छलिया?

ajmer-kesri

अजमेर सिंह रंधावा