इंदौर के शैतान-RSS के गुलाम सिख

कुछ दिन पहले ही गुरुद्वारा करतार कीर्तन को इंदौर नगर निगम द्वारा तोड़े जाने पर सिख समाज से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गयी थीं! मैंने भी इसकी विस्तृत जानकारी ली तो पाया कि जहां इंदौर नगर निगम, मध्य प्रदेश सरकार, भारत सरकार तथा इनके आका आरएसएस के मोहन भागवत का इस गुरूद्वारे के तोड़े जाने में हाथ है वहीँ इनके हाथों के खिलौने बने कुछ महत्वाकांक्षी सिख (जिनका सीधा संबंध RSS से है) भी इसमें शामिल हैं!

Indore ke shaitan

Indore ke shaitan-1

है तो यह सत्य लेकिन कितना घिनावना कि एक गुरूद्वारे को तोड़ने में इतने महत्वपूर्ण लोगों, सम्मानित हस्तियों तथा स्वयं राज्य सरकार तथा भारत सरकार का भी हाथ होना महसूस किया जाये तो कितना आश्चर्य लगता है! इंदौर नगर निगम, मध्य प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार, ये तीनों भाजपा शासित हैं  और ये सिख विरोधी तथा भारत के अल्पसंख्यकों के कटटर विरोधी RSS द्वारा रिमोट संचालित हैं, RSS के निर्देश, ये तीनों तुरंत स्वीकार करते हैं!

गुरुद्वारा करतार कीर्तन, ५० वर्ष पुरानी ईमारत का एक हिस्सा था, इसकी बाकायदा रजिस्ट्री है, प्रॉपर्टी टैक्स दिया जाता है, बिजली बिल अदा किया जाता है न कि इंदौर के मशरूमों की तरह उग आये मंदिरों की तरह जो हर सड़क के मध्य, हर चौक पर तथा फुटपाथ को घेरे रहते हैं, कटिया डाल कर मुफ्त की बिजली लेते हैं, कोई प्रॉपर्टी टैक्स नहीं देते ! इनमें से किसी भी मंदिर को चाहे वह छोटा हो या बड़ा, किसी को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गयी, (हमने इन सभी मंदिरों की वीडियोग्राफी भी करवा ली है)! फिर भी गुरूद्वारे को ही निशाना क्यों बनाया गया?

गुरुद्वारा करतार कीर्तन के संचालक हैं भाई रतीन्द्र सिंह जिनका सिख समाज में बहुत नाम है, गुरसिख हैं तथा सिख समाज पर किसी भी तरह के अंदरूनी या बाहरी हमले का वे अपनी विद्वता से भरपूर विरोध करते हैं! RSS जैसे कटटर हिन्दू संगठन में भी उनकी वजह से बौखलाहट पैदा हो गयी थी! RSS की किसी भी सिख विरोधी कार्रवाई का वे डट कर सामना करते था, इतना सिख विद्वान RSS के प्रबंधकों की आँखों का कांटा बन गया था अत: इन सभी ने मिलकर भाई रतीन्द्र सिंह जी को सबक सिखाने की सोची और इसके लिए मध्य प्रदेश की राज्य सरकार, इंदौर नगर निगम ने मिलकर स्मार्ट सिटी योजना के तहत इंदौर को लेकर इस की सड़कें चौड़ी करने का प्लान तैयार किया, जिससे इस गुरूद्वारे को तोड़ भी दिया जाये और RSS के बिकाऊ सिखों द्वारा इस अनुचित कार्रवाई को सही भी ठहरा दिया जाये! इस गुप्त प्लान की जानकारी गुरुद्वारा प्रबंधन को नहीं दी गयी लेकिन गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर भाई रतीन्द्र सिंह जी ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखा तथा है कोर्ट से गुरूद्वारे को तोड़े जाने के खिलाफ रोक का आदेश भी पारित करवा लिया गया!

मध्य प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग ने भाई रतीन्द्र सिंह जी को सूचना दी की वे ५ मई को गुरुद्वारा तोड़े जाने संबंधी मामले की सुनवाई करेंगे लेकिन २२ अप्रैल को ही नगर निगम इस गुरूद्वारे को तुड़वा देता है, अधिकारी न तो हाई कोर्ट के रोक के आदेश को मानते हैं न ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा किसी सुनवाई के इंतज़ार की कोई जरूरत महसूस करते हैं!

और जब सिख समाज ने पाया कि सड़कें तो और भी चौड़ी की गयीं लेकिन मंदिर जस के तस हैं तो संपूर्ण इंदौर की सड़कों की विडिओग्राफी भी की गयी और सर्वेक्षण भी! इसी राजमोहल्ला की मुख्य सड़क जहां गुरुद्वारा तोडा गया, यह सड़क आगे जाकर गणपति चौक पर निकलती है और फिर सीधा राजवाड़ा की ओर चली जाती है! हम आश्चर्यचकित रह गए जब हमने देखा कि गणपति मंदिर जो चौक पर ही बना है, उसको बचने के लिए प्लान को ही बदल दिया गया था! यह सड़क दोनों ओर से ३०-३० फ़ीट चौड़ी की गयी थी लेकिन गणपति मोड़ पर आकर इस को घुमाव दे दिया गया और दोनों और ३०-३० फ़ीट तोड़ने की अपेक्षा इंदौर निवासियों पर कहर बरपा दिया गया, गणपति मंदिर के दूसरी और ६० फ़ीट सड़क नाप ली गयी और उसे एक तरफ के घर गिरा कर सड़क की पूरी चौड़ाई ले ली गयी, ऐसा ही गणपति मोड़ को पार कर राजवाड़ा जाने वाली सड़क के प्रारंभ में दुहराया गया और वहां भी एक ही ओर से ६० फ़ीट ज़मीन ले ली गयी!

अब सोचिये कि ६० फ़ीट की गहराई तक जिनके घर टूटे होंगे, उनके घरों में क्या बचा होगा? उन पर तो गरीब मार कर दी गयी, गणेश जी को भले ही लड्डू भोग लगाते रहो, चढ़ाते रहो?

मध्य प्रदेश  अलप संख्यक आयोग की लापरवाही देखते हुए हमने इंदौर के जाने माने सिख चेहरों को खंगालना शुरू किया तो पाया कि वे सभी राष्ट्रीय सिख संगत (जो RSS द्वारा सिखों को हिन्दू साबित करने के मक़सद से RSS द्वारा ही कुछ सिखों को खरीद कर, उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने और सिख धर्म के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है, इसके एक अध्यक्ष रुलदा सिंह की सिख विरोधी कार्रवाइयों के चलते हत्या भी की जा चुकी है) से संबंधित हैं! इसके सदस्य डाक्टर अमरजीत सिंह भल्ला, को जो सहारा अस्पताल, ग्वालयर के मालिक, एवं निदेशक भी हैं, को २ जनवरी २०१७ को मनोनीत किया गया था, ये राष्ट्रीय सिख संगत से संबंधित हैं, जिसके सबूत भी हम तस्वीरों के माध्यम से दे रहे हैं! इन्होने गुरुद्वारा तोड़े जाने पर एक प्रेस विञप्ति जारी की थी, जिस पर इनके या किसी अन्य अधिकारी के न तो हस्ताक्षर ही हैं और न ही कोई क्रमांक नंबर, न ही जारी करने की तारीख!

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इन बिकाऊ सिखों के RSS के द्वारा संचालित किसी भी प्रोग्राम में इनके शामिल होने पर इंदौर के सिख संगठनों तथा भाई रतिंदर सिंह जी द्वारा विरोध भी किया गया था, इस संबंध में अकाल तख्त से निर्देश भी हैं कि RSS सिख विरोधी है और सिख समाज को इससे दूर रहना चाहिए लेकिन यह चंडाल चौकड़ी फिर भी नहीं मानी!

Hukamnama against RSS

अकाल तखत द्वारा RSS के विरुद्ध जारी किया गया हुकमनामा 
फिर हमने और खोज की तो इस सिख चंडाल चौकड़ी के सिख विरोधी RSS से गहरे संबंध उजागर हुए! आप ही इन तस्वीरों को देखिये जो स्वयं ही अपने आप इनका खुलासा करती हैं!

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यह चंडाल चौकड़ी सिख धर्म से संबंधित किसी भी प्रायोजित कार्यक्रम में RSS के ही वक्ताओं, नेताओं और प्रतिनिनिधियों को आमंत्रित करती है जैसे कि डाक्टर अमरजीत सिंह भल्ला, जो कि राज्य अल्प संख्यक आयोग के मनोनीत सदस्य हैं, लेकिन अपने को चेयरमैन लिखते हैं! इन्होने २०१५ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष होते हुए विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष कट्टर हिंदूवादी, मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक विरोधी प्रवीण तोगड़िया को आमंत्रित किया! उनका स्वागत तो हिन्दू धार्मिक रीति से तिलक लगा कर किया गया लेकिन अमरजीत सिंह भल्ला इस चमचागिरी में कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने भी अपने माथे पर तिलक लगवा कर अपने को हिन्दू साबित किया!

सबूत देखें;

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RSS-10 Amarjit Bhalla with Togadiya

ये महानुभाव भी अपने काळा धंधों को सफेद करने के लिए इस कटटर हिंदूवादी संगठन RSS (राष्ट्रीय सिख संगत) के लिए काम करते हैं! इन्होने भी RSS की पत्रिका संगत संसार के प्रसार एवं प्रचार के लिए अपने को तन-मन-धन से समर्पित कर रखा है! इस मैगज़ीन की एक प्रतिलिपि, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज चौहान को भेंट करने वे अपने RSS के अन्य सहयोगियों के साथ पहुंचे व् नतमस्तक होकर अपनी आस्था RSS में जताई जिससे इन्हें पंजाबी साहित्य अकादमी के चेयरमैन बने रहने का सौभाग्य प्राप्त हो सके, मुख्य मंत्री का वरद हस्त प्राप्त हो, भले ही साहित्यिक क्षेत्र में इनका अपने योगदान नगण्य हो!
आप स्वयं देखिए;

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खनूजा जैसे गिरे हुए चरित्र के व्यक्ति, राजनीतिक गलियारों में पहुँच बनाये रखने के लिए नीच से भी नीच लोगों का सहारा लेने में संकोच नहीं करते, धर्म तो इनके लिए एक सीढ़ी है जिससे ये अपनी राजनीतिक महत्व आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं! इस निम्न तस्वीर में इंद्रजीत खनूजा राष्ट्रीय सिख संगत के अध्यक्ष गुरचरण गिल के साथ दिखाई दे रहे हैं;

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मंजीत सिंह उर्फ़ रिंकू भाटिया भी इसी जुंडली का एक हिस्सा हैं! ये शराब व्यवसायी हैं ! बहुत ही चरिवान एवं गुणी व्यक्ति हैं जिनके जीवन का एक ही ध्येय है कि  येन-केन-प्रकारेण मध्य प्रदेश के प्रत्येक घर के कम से कम एक व्यक्ति को शराब अवश्य सेवन करनी चाहिए जिससे दिन भर की थकान महसूस न हो! इस महान कार्य के लिए चाहे इनके गुरुओं का निरादर भी हो तो भी इन्हें स्वीकार है! इस निम्न तस्वीर में देखिये कि कैसे गुरु नानक देव जी महाराज को कतिपय नेताओं तथा भगत सिंह के समकक्ष सुशोभित कर दिया है लेकिन इन्हें अपने को राष्ट्रीय सिख संगत के साथ जुड़े होने पर गर्व महसूस होता है!

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आश्चर्य होता है कि गुरुद्वारा टूटने पर भी इन मरी हुई ज़मीर वाले सिखों के मन आहत नहीं होते अपितु फिर भी निजी स्वार्थों की लालसा पूर्ति के लिए ये आज भी हिन्दू कटटरवादी, सिख विरोधी संगठन के साथ मिल कर अपने ही धर्म को हानि पहुंचा रहे है तो क्या इन्हें आस्तीन के सांप नहीं कहा जाना चाहिए?

गुरु के सिख तो ये कदापि नहीं?

ajmer-kesri

अजमेर सिंह रंधावा

 

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