सिकलीगर सिखों की सारी मुसीबतों की जड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ?

हैं आश्चर्य चकित करने वाली खबर कि सिकलीगर सिखों की सारी  मुसीबतों की जड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही है?

जी हाँ यही कटु सत्य है!

Sikligar Mhapanchait-2

पिछले कुछ समय से इन गरीब सिकलीगर परिवारों पर पुलिसिया कहर की ख़बरें अख़बारों में रही थीं लेकिन कोई पुख्ता जानकारी हासिल नहीं हो पा रही थी! भारत के अख़बार वालों को या मीडिया को तो सिर्फ मसाला चाहिए, वे विदेशी पत्रकारों की तरह किसी खबर की तह तक नहीं जाते! परन्तु उनकी खबरें किसी निर्दोष को अपराधी अवश्य घोषित कर देती हैं!

हम भी कुछ समय खबरों के पीछे छुपे कारणों का पता लगने तक शांत रहे लेकिन मन काफी उद्वेलित रहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि ६५० सिख युवकों पर हथियार बनाने के मुकदमें दायर कर दिए जाएँ और उनकी गिरफ्तारियां शुरू कर दी जाएँ?

उधर इंदौर में ही गुरुद्वारा करतार कीर्तन को तुड़वाने में भी इसी हिन्दू कटटरवादी संगठन RSS का नाम रहा था! उस से संबंधित तथ्यों को एकत्रित करना और फिर राष्ट्रीय सिख संगत के कतिपय क्षेत्रीय नेताओं के हाथ होने के भी सबूत मिले जिन्होंने व्यक्तिगत दुश्मनी निकलने के लिए मौका देख अपने आकाओंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साथ दिया?

018

इस से बड़ी निंदनीय और शर्मनाक घटना किसी सिख के लिए और क्या हो सकती है कि वह सांसारिक उपलब्धियों या सुखों को प्राप्त करने के लिए अपने चारित्रिक पतन का परिचय दे?

डूब मरना चाहिए उन्हें जो अपने गुरु से ही धोखा करते हैं!

इन बेचारे गरीब सिकलीगर सिखों (सिकलीगर का अर्थ हैकच्चे लोहे को तपा कर आकार देने, सुदृढ़ करने और चमका देने वाला तथा हथियारों को तेज़ धार देने वाला कारीगर) को तो हथियार बनाने के जुर्म में अपराधी घोषित कर दिया गया लेकिन यदि ये या अन्य जो भी व्यक्ति हथियार बनाते हैं, उनके बनाये हथियार खरीदता कौन है? कौन है जो उन्हें कच्चा माल खरीदने के लिए पैसे दे और उनके द्वारा बनाये गए हथियार ले जाये? अगर एक व्यक्ति एक दिन में १० हथियार बना देता है तो एक दिन में लगभग ६५०० हथियार तैयार होते हैं, तो कौन हैं इन हथियारों के ये बड़े खरीदार?

तब हमें पता चला कि इन हथियारों को RSS खरीदती है! लेकिन पिछले वर्षों से इन सिख कारीगरों ने अब हथियार बनाना बंद कर दिए हैं, इसकी अपेक्षा वे ड्राइवर या गुरुद्वारों में सेवादारी वगैरा करके अपने परिवार का पेट पालते हैं!

इससे RSS को बहुत क्षति पहुंची है, इनके हथियार अत्यंत उत्तम कोटि के होते हैं, इन्होने ने सिख गुरुओं को हथियार बना कर दिए, सिख फौजों को भी हथियार बना कर दिए जिससे अब्दाली जैसे निरंकुश हत्यारे शासकों को सिख फौजों ने पस्त कर दिया था, इनके बनाये हथियारों से ही सिख फौजों ने काबुल कंधार तक फतह हासिल की, लदाख, कश्मीर जीता, चीन तक दहला दिया लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद अपने घर में ही उपेक्षित करार दे दिए गए!

ये गुरु के परम् शिष्य हैं, इन्हें सिख धर्म के बारे जानकारी देने और और सुस्थापित करने के लिए कुछ जागरूक सिख संस्थाएं आगे आईं जिनमें प्रमुख है इंग्लैंड की ब्रिटिश सिख काउन्सिल! इस संस्था ने इनके लिए पानी के प्रबंध के लिए बोरवेल खुदवाये, स्वच्छ पानी मुहैय्या करवाया, गुरूद्वारे बनवाये, बच्चों को शिक्षित करना प्रांरभ किया, मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध करवाई गयीं और इनके जीवन स्तर को उठाने के लिए, अच्छे नागरिक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किये गए जिससे प्रेरित होकर इन सिकलीगरों ने अपने पुश्तैनी धंधे को तिलांजलि दे दी!

Sikligar mhapanchait-1

Sikligar arrests

Sikligar

इससे RSS  जैसे कटटर हिन्दू संगठन उद्वेलित हो उठे और इन गरीब सिखों को ब्लैक मेल करने के लिए इन पर दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया, इसी कड़ी में इन पर झूठे मुकदमें दर्ज़ करवा दिए गए और ये डर के मारे घर बार छोड़ जंगलों में जा छिपे!

जब कोई हल निकला तो पहले तो इनके परिवारों ने सिख धर्म छोड़ने की बात की क्योंकि मध्य प्रदेश की पुलिस इनके दाढ़ी और केश तथा पगड़ी देख कर इन्हें अपराधी समझ बैठती है! परन्तु पंजाब के तथा अन्य राज्यों के सिखों को जब सच्चाई का पता चला तो सिख समाज में आक्रोश फ़ैल गया और फिर सिख संस्थाओं ने अपने प्रतिनिधि भेज कर स्थिति की जानकारी ली और इन परिवारों की सहायता के लिए कमर कस ली! श्री अकाल तख़्त तक शिकायत पहुंची तो दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी ने भी अपने प्रतिनिधि भेजे!

भारतीय मीडिया भले ही खामोश रहा हो क्योंकि यह जुल्म सिखों के साथ हो रहा था और करने वाले थे कटटर हिन्दू!

लेकिन पंजाबी पत्रकार खामोश नहीं बैठे! पंजाब की शायद ही कोई पत्रिका हो या अख़बार हो जिसने मध्य प्रदेश सरकार की भर्त्स्ना की हो या RSS  को नंगा किया हो?

अब देखना है कि मध्य प्रदेश सरकार क्या रुख लेती है, टकराव का या सत्य का साथ देने का? सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी तथा अकाल तखत भी उदासीन नहीं रह सकते! और दिन में स्थिति के और स्पष्ट होने के आसार हैं, तभी कहा  जा सकेगा कि यह स्थिति क्या १९८४ से भिन्न है या इसकी पुनरावृत्ति?

ajmer-kesri

अजमेर सिंह रंधावा !

One thought on “सिकलीगर सिखों की सारी मुसीबतों की जड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *